Monday, December 2, 2013

एक लड़की ऐसी है जो बचपन में बड़ी हो गयी

एक लड़की ऐसी है जो बचपन में बड़ी हो गयी,
शोर से इस रोज़मर्रा में अनसुनी सी ध्वनि हो गयी |
हल्के फुल्के कंधों पे उत्तरदायित्व से सनी हो गयी,
भागते से जीवन में रुकी सी खड़ी हो गयी |
सिलवटों से छुटपन में क्षण में घड़ी हो गयी,
कभी हंसी में बहती एक अश्रु की बूंद, मल्हार सी लड़ी हो गयी,
पुरुष के छोटे पौरुष की बड़ी सी तड़ी हो गयी |
नर-अहंकार के मरूस्थल में घास की पत्ती सी हरी हो गयी,
सैंकड़ो मर्द दानवों में नन्ही सी परी हो गयी |
अल्पायु की वायु में भी गोद कुछ भरी हो गयी,
आज ना फिर पढ़ पायी वो, इस बात की कड़ी हो गयी,
एक लड़की ऐसी है जो बचपन में बड़ी हो गयी |

7 comments:

  1. कुछ ख्वाब जैसे टूट गए हों, पैरों में कड़ी हो गई,
    एक लड़की ऐसी है जो बचपन में बड़ी हो गयी |

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  3. Logo ke taano ne todi khwabo ki duniya jo thi dil me basai...
    Sach main, ek ladki aesi hain jo bachpan main badi ho gai...

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  4. that is the true condition of indian girl....

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  5. soo true..!!! ek ladki aisi hai jo bachpan main badi ho gayi..!!!

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  6. ya bro aaj kal saari ladkiya bachpan me hi badi ho jati hai...............

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  7. waah waah...kya baat kya baat...aap la jawab ho...mast

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